June 29, 2018 admin 0Comment

नई दिल्लीः कई राज्यों में राज्यपाल रह चुके भीष्ण नारायण सिंह ने कहा कि भोजपुरी की माटी में विद्वता है, शक्ति है, प्रेरणा है, जो हमें हमेशा एक-दूसरे से न केवल जोड़े रखती है बल्कि भाईचारे का संदेश भी देती है। यहां तक कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी भोजपुरी भाषा को चुना था।  रविवार को श्री सिंह भोजपुरी एसोसिएशन आफ इंडिया और समाचार पत्रिका द संडे इंडियन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। रविवार को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 108वीं जयंती पर राजघाट स्थित गांधी स्मऋति दर्शन समिति के सत्याग्रह मंडप में भोजपुरी भाषियों के इस सम्मेलन में कई प्रस्ताव पारित किये गये तथा इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रतिज्ञा की गयी। समारोह को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने  मॉरीशस का उदाहरण देते हुए कहा कि दुख की बात यह है कि दूसरे देश में भोजपुरी को आधिकारिक भाषा की मान्यता मिल चुकी है, लेकिन अपने देश में ही यह भाषा आज भी अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रही है। इस मौके पर आईआईपीएम के चेयरमैन प्रो। अरिन्दम चौधरी को संत कबीर स्मृति सम्मान,  पूर्व राज्यपाल एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता भीष्म नारायण सिंह को डा। राजेन्द्र प्रसाद स्मृति सम्मान से नवाजा गया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लोकनायक स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया, उनकी आ॓र से यह सम्मान दिल्ली में डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर कारूराम ने ग्रहण किया। कुवंर सिंह स्मृति सम्मान से वरिष्ठ भाजपा नेता कलराज मिश्र को भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर जानीमानी गायिका पद्मश्री शारदा सिन्हा, गायिका मालिनी अवस्थी, फिल्मकार व संगीतकार दुर्गा दास आदि को भोजपुरी भूषण सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान द संडे इडियन के प्रधान संपादक और प्लानमैन मीडिया के अध्यक्ष प्रो। अरिन्दम चौधरी, शारदा सिन्हा, मालिनी अवस्थी, विजया भारती, अभिनेत्री रानी चटर्जी आदि ने प्रदान किए। कार्यक्रम में अमेरिका के डलास स्थित भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेश मिश्रा समेत कई गण्यमान्य व्यक्ति मौजूद थे। भोजपुरी एसोसिएशन आफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक (एशिया) व द संडे इंडियन के कार्यकारी संपादक (हिंदी व भोजपुरी) ओंकारेश्वर पांडेय ने कहा कि इस सम्मेलन में जुटी भीड़ ने स्पष्ट कर दिया है कि भोजपुरी की अब उपेक्षा नहीं की जा सकती। इनके अलावा कलराज मिश्र सहित अन्य कई लोगों को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान भोजपुरी भाषा की दशा व दिशा तथा इसकी स्थिति में सुधार के लिए आयोजित परिचर्चा में यह निष्कर्ष निकाला गया कि सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक स्तर पर हम सभी पंद्रह करोड़ भोजपुरी बोलने वाले इससे जुड़ें रहें और भोजपूरी को उसका हक दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहें। इस मौके पर राजधानी में भोजपुरी को पहचान दिलाने वाले अजीत दूबे ने कहा कि चाहे प्रदेश स्तर की बात हो या फिर राष्ट्रीय स्तर पर, भोजपुरी भाषा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं। आज भोजपुरी फिल्में जिस तेजी से व्यवसायिक रूप में उभरी हैं, वह अपने आप में शुभ संकेत है। इस मौके पर पद्मश्री शारदा सिन्हा ने भोजपुरी भाषा को अपनी कर्म भाषा करार देते हुए अपनी गायिकी से उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया। इस दौरान लोक गायिका मालिनी अवस्थी, विजया भारती ने भी गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेष मिश्रा, प्रो। सदानंद साही, इग्नू के प्रो। शत्रुघ्न मिश्रा समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। समारोह के दौरान सहारा इंडिया परिवार के चेयरमैन ‘सहाराश्री’ श्री सुब्रत राय ‘सहारा’ को भी पद्मश्री शारदा सिन्हा ने ‘महात्मा गांधी स्मृति’ सम्मान से नवाजा। सहाराश्री की अनुपस्थिति में यह सम्मान ‘सहारा टाइम’ के संपादक उदय सिन्हा ने ग्रहण किया। इस मौके पर भोजपुरी के प्रचार-प्रसार व विकास के लिए काम करने वाले कई अन्य विशष्टि व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया। पहली बार राजधानी में आयोजित भोजपुरी सम्मेलन में इस भाषा की दशा-दिशा पर गहन चर्चा हुई। सम्मेलन में उदय सिन्हा ने सहाराश्री के संदेश को पढ़कर सुनाया। अपने संदेश में सहाराश्री ने कहा कि आधुनिक हिन्दी के उत्थान में अन्य भाषा एवं बोलियों के साथ-साथ मैथिली, मगही, अवधी और ब्रजभाषा का ही नहीं बल्कि भोजपुरी का भी महती योगदान है। विस्तार और व्यापकता की दृष्टि से भोजपुरी अग्रगण्य और सबसे अधिक उदार भाषा है। इसके उच्चारण में जो मिठास और माधुर्य है, वह हिन्दी की अन्य किसी भी भाषा-बोली में नहीं है। यही कारण है कि सिनेमा से लेकर साहित्य तक जहां कहीं भी हिन्दी का प्रयोग होता है वहां यह सहज ही स्वीकार्य है। भोजपुरी कि विकास व इसके प्रचार-प्रसार के लिए बाबू जगजीवन राम स्मृति सम्मान से भारत के उच्चायुक्त, मारीशस सरकार के मुखेश्वर चून्नी, संत कबीर स्मृति सम्मान से प्रोफेसर  अरिंदम चौधरी, भिखारी  ठाकुर स्मृति सम्मान, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री  मतंग सिंह, भिखारी  ठाकुर स्मृति सम्मान से श्री  पी।के। सिंह, भिखारी  ठाकुर स्मृति सम्मान से श्री  अंबिका नंद सहाय, भिखारी  ठाकुर स्मृति सम्मान से श्री  अशोक द्विवेदी, भोजपुरी भूषण सम्मान से पदमश्री शारदा सिन्हा, भोजपुरी भूषण सम्मान से श्री  कुणाल सिंह, भोजपुरी भूषण सम्मान से श्रीमती मालिनी अवस्थी, भोजपुरीश्री सम्मान से सुश्री  अनामिका सिंह, भोजपुरीश्री सम्मान से श्री  नंदन – चंदन, भोजपुरीश्री सम्मान से श्री  प्रियेश कुमार, भोजपुरी भूषण सम्मान से श्री  कवि कुमार, भोजपुरी भूषण सम्मान से श्री  किशन खदरिया, भोजपुरी भूषण सम्मान से श्री  दुर्गा प्रसाद, भोजपुरी भूषण सम्मान से डॉ। अनिल सिंह, भोजपुरीश्री सम्मान से सुश्री  रानी चटर्जी, श्री  कुलजीत सिंह चहल, श्री  अमित कुमार, भोजपुरी कीर्ति सम्मान से श्री  अजीत दूबे, श्री  अशोक श्रीवास्तव, श्री  श्रीकांत सिंह यादव, श्री  शिवाजी सिंह, श्री  निर्मल पाठक, श्री  अश्वनी कुमार  सिंह, श्री  निर्मल सिंह, श्री संतोष पटेल, श्री  वीरेन्द्र गुप्ता, श्री  शत्रुध्न प्रसाद, प्रो। डॉ। रामपाल सिंह, रवीन्द्र  नाथ श्रीवास्तव परिचय दास, प्रो। डॉ। डीपी सिंह, श्री  आनंद वर्धन शुक्ला, भोजपुरी मित्र सम्मान से श्री  दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, दिल्ली, भोजपुरी रत्न सम्मान से गिरिजा  शंकर राय गिरिजेश, रवीन्द्र  श्रीवास्तव जुगानी भाई, अरविन्द विद्रोही, डॉ। आर के दूबे, विश्वनाथ शर्मा, बृज मोहन प्रसाद अनाड़ी, डॉ। जनार्दन सिंह, श्री  विशुद्धानंद, डॉ। भगवती प्रसाद द्विवेदी, श्री  सतीश कुमार सिन्हा को  सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में भोजपुरी की लोकगायिका पद्मश्री शारदा सिन्हा, विजया भारती, मालिनी अवस्थी, अनामिका व टीवी कलाकार नंदन चंदन के अलावा भोजपुरी फिल्म की जानी मानी अभिनेत्री रानी चटर्जी ने अपनी फनकारी पेश की। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से भारी संख्या में भोजपुरी लोग शामिल हुए।

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